दर्द दर्द ही रहे तो अच्छा है
नासूर न बन जाए तो अच्छा है
मेरी बेचैनी की खबर न दे उसे कोई
वो बेखबर ही रहे तो अच्छा है
क्या भरोसा इंसानियत का यहाँ
एहतियात खुद ही बरत ले तो अच्छा है
चंद शब्द कागजों पे उकेर लेने भर से
ग़ज़ल नहीं बनता
तेरे भीतर का शायर भीतर ही रहे तो अच्छा है
यहाँ हर इल्म जुड़ा है रोटी से
जितनी जल्दी तू सिख जाए तो अच्छा है